कोल्ड्रिंक पिने से नुक्सान। - GyanKeGuruji

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कोल्ड्रिंक पिने से नुक्सान।

Cold drink,
Cold drink

आज हम बात बात करेंगे कोल्ड्रिंक की | आज हम जानेगे की कोल्ड्रिंक पिने से हमारे शरीर में क्या होता है | हम सब जानते है कोल्ड्रिंक चाहे किसी भी तरह की हो किसी भी कम्पनी की हो हमारे सेहत के  लिए हानिकारक होता है लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी कोल्ड्रिक का सेवन दुगुनी रफ़्तार से बढ़ता चला जा रहा है। T.V. पर दिखाए गए प्रचार और हमारे आस पास मौजूद लोगो को कोल्ड्रिंक पीते देख कर हमारे मन में कोल्ड्रिंक पिने की इच्छा पैदा हो ही जाती है। और खास कर गर्मियों में ज्यादातर लोग प्यास बुझाने और शरीर को ठंडा करने के लिए पिते  है लेकिन कोल्ड्रिंक के अंदर कार्बोनेटेड वाटर, चीनी, खतरनाक कैमिकल और आर्टिफिसियल कलर बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते है जो की हमारे शरीर को ठंडा करने की जगह पेट में एसिड की मात्रा और शरीर में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा देते है जो लोग कोल्ड्रिंक ज्यादा पिते है उन्हें पता भी नहीं होता कि उनके शरीर में आयी परेशानियो की मुख्य वजह  सिर्फ और सिर्फ कोल्ड्रिंक हो शक्ति है। इतने सारे बुरे तत्व होने की वजह से इसे पिने के 5  मिनट बाद ही यह हमारे शरीर पर असर दिखाना सुरु कर देती है तो आइये जानते है कोल्ड्रिंक पिने के बाद अगले 1 घण्टे बाद हमारे शरीर में क्या क्या होता है। 


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कोल्ड्रिंक पीना अपने आप से चीनी खाने के बराबर होता है क्योकि एक 300 से 350 तक की बोतल में लगभग 35 से 45 ग्राम चीनी होती है जब हम कोल्ड्रिंक पिते है तो एक गिलाश कोल्ड्रिंक पिने पर शुरुआत के 5 से 10 मिनट में ही लगभग 10 चम्मच चीनी चली जाती है जो की हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को इतना बढ़ा देती है जितने ग्लूकोज की हमें एक पुरे दिन में जरुरत होती है। सामान्यतः हम इतना ज्यादा मीठा नहीं खा पाते है क्यों की ज्यादातर लोगो को मीठा खाने से पेट जल्दी भरा हुआ महसूस होने  लगता है। अगर इतनी सारी चीनी शरीर के अंदर एक बार में चली जाये तो इससे हमें घबराहट होने लगती है और उल्टी करने का मन करने लगता है। लेकिन कोल्ड्रिंक में इतनी चीनी होने के बाद भी हमें इसे पिने के बाद कुछ भी महसूस नहीं होता क्योकि कोल्ड्रिंक के अन्दर बहुत अधिक मात्रा में फॉस्फोरिक एसिड मिलाया जाता है जो की इसकी मिठास को कम करने का करता है। कोल्ड्रिंक पिने के 20 मिनट बाद हमारे शरीर में शुगर की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ने लगती है जिसे हजम करने के लिए हमारे शरीर में इन्सुलिन का बहाव तेज हो जाता है। एक साथ हो रही इस प्रक्रिया हो हमारा लिवर ठीक तरह से हैंडल नहीं कर पाता और शुगर की मात्रा अधिक होने की वजह से हमारा शरीर उस शुगर को पचाने की जगह फैट यानि चर्बी में बदलने लग जाता है। कोल्ड्रिंक में चाय, सिगरेट, और कॉफी की तरह कैफीन भी पाया जाता है जो कोल्ड्रिंक पिने के 40 मिनट बाद हमारे शरीर में पुरी तरह से मिल जाता है। कैफीन की वजह से हमारे आँखों की पुतलिया फैलने लगती है चाय और काफी की तरह इसे पिने से भी हमारी नींद उड़ने लगती है। आलस गायब होने लगती है और हम पहले से ज्यादा ताजा महसूस करने लगते है इस दौरान हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। जिसे कण्ट्रोल करने के लिए हमारा लिवर और ज्यादा शुगर छोड़ने लगता है। कोल्ड्रिंक  पिने के 50 मिनट बाद हमारे शरीर में दिमाग को खुशी प्रदान करने वाले कैमिकल डोपमीन की मात्रा  बढ़ने लग जाती है। जिससे की हमें अच्छा महसूस होने लगता है और एक तरह के खुशी का एहसास होने लगता है। कोल्ड्रिंक के अंदर कैफीन और फोसफेरिक एसिड की मात्रा अधिक होने से हमारे शरीर में कैल्शियम, मैग्नीशियम और ज़िंक जैसे मिनरल की कमी हो जाती है जिससे की हड्डिया और मांसपेसिया तेजी से कमजोर होने लगती है। इस लिए इतने सारे पोशाक तत्वों में तेजी से गिरावट आने के कारण एक घण्टे  बाद हमारा शरीर पूरी तरह थका हुआ महसूस करने लगता है। कोल्ड्रिंक या सॉफ्ट ड्रिंक  बनाने में किसी भी तरह के प्राकृतिक फलो का इस्तेमाल नहीं होता है और कई कोल्ड्रिंक्स पर तो ये लिखा भी होता है। 
 दांतो और हड्डियों में कमजोरी आना, ब्रेस्ट कैंसर, डायबटीज और प्रोस्टेड कैंसर के साथ-साथ पेट में अल्सर, एसिडिटी, फैटिय लिवर और हार्टअटैक जैसी गम्भीर बिमारिया कोल्ड्रिंक का ज्यादा सेवन करने से हो सकती है। फिर भी कुछ लोग ऐसे शौक से पीते है और जिन लोगो को इसकी आदत पड़ जाती है वो इसे हर मौसम में पीते है। ज्यादातर कोल्ड्रिंक बनाने वाली कम्पनिया विदेशी होती है और एक विदेशी ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक जो लोग ज्यादा कोल्ड्रिंक पिते है उनके शरीर में दूसरे लोगो के मुताबिक आवश्यक तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे की वह उम्र से पहले ही बूढ़े हो जाते है। कोल्ड्रिन खरीदना मतलब की बीमारी खरीदना हुआ। 
इस लिए कोशिश करे की पिने की चीजों में शरबत, फलो का रास और दूध जैसी चीजों का इस्तेमाल करे। कोल्ड्रिंक का सेवन कम से कम करे। और हो सके तो पूरी तरह बंद ही कर दे। 










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